October 14, 2021

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आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के छात्रों को पुलिस द्वारा लाठी से मारा, एक छात्र का हाथ टूटा

आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (एकेयू) के इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों पर पुलिस ने जमकर ने लाठियां भांजी। लाठीचार्ज के दौरान एक छात्र का हाथ टूट गया जबकि दर्जनों छात्रों के घायल होने की सूचना है। बता दें कि पहले सेमेस्ट की परीक्षा लंबित है। छात्र कई दिनों से प्रमोट करने की मांग कर रहे थे। छात्रों की मांग थी कि जिस प्रकार चौथे और छठे सेमेस्टर के छात्रों को प्रमोट किया जा चुका है, उसकी प्रकार पहले सेमेस्टर के छात्रों को भी प्रमोट किया जाए।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्पष्ट जवाब न मिलते देख भारी संख्या में छात्र मंगलवार को विवि परिसर के पास जुटे थे। आंदोलनकारी छात्र नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को पहले समझाया, बाद में लाठीचार्ज कर छात्रों की भीड़ को तितर-बितर किया। कई छात्रों को इस दौरान गम्भीर चोटें आई हैं। एक छात्र का हाथ भी टूट गया है। कुछ छात्रों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया है। 

इधर विवि प्रशासन की ओर से अबतक छात्रों के प्रोमोट करने और न करने को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है। छात्रों का कहना है कि पहले ही फर्स्ट सेमेस्टर के छात्रों का सत्र आठ महीने लेट हो चुका है। अब अगर परीक्षा ली जायेगी तो रिजल्ट आने में एक डेढ़ महीने लग जायेंगे। ऐसे में एक साल सत्र लेट हो जाएगा। उन्हें इंटर्नल मार्क्स के आधार पर प्रोमोट कर दिया जाए। इस तरह की गाइडलाइन होने के बावजूद विवि जानबूझकर छात्रों की मांग को नजरंदाज कर रहा है। छात्रों ने कहा कि इन मांगों को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।  एकेयू से जुड़े बिहार के सभी इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र इस मांग पर एकजुट हैं।

छात्रों के हंगामे और प्रदर्शन के मामले में आर्यभट्ट ज्ञान विवि के परीक्षा नियंत्रक राजीव रंजन ने कहा कि छात्रों की मांग विवि के एक्जामिनेशन बोर्ड के विचाराधीन है। वे पिछले हफ्ते विवि के अधिकारियों से मिलकर गए हैं और उनकी मांगों पर विचार करने का उन्हें आश्वासन भी दिया गया है। कोरोना काल में किसी तरह की परीक्षा नहीं लेने के सरकार का निर्देश था। ऐसे में परीक्षा लेना संभव ही नहीं था। हाल में जब परीक्षा को लेकर निर्देश आया है तो सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। राज्य के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों से प्रथम वर्ष के छात्रों के इंटरनल मार्क्स मांगे गए हैं। पांच कॉलेजों ने एक्सेल शीट में मार्क्स नहीं भेजा था। 

पूरे मामले में सबसे पड़ा पेच यह है कि सभी छात्र पहले सेमेस्टर के हैं। अन्य सेमेस्टर के होते तो पिछले सेमेस्टर के आधार पर और इंटरनल मार्क्स के आधार पर उन्हें आसानी से प्रमोट किया जा सकता था। अगर केवल इंटरनल मार्क्स के आधार पर प्रमोट कर भी दिया जाये तो छात्रों के अंक में बड़ा डिफरेंस हो जाएगा क्योंकि अलग-अलग कॉलेजों में इंटरनल मार्क्स अलग अलग हैं। कहीं काफी ज्यादा है तो कहीं काफी कम। फिर भी छात्रों की मांग को देखते हुए दो दिन बाद एक्जामिनेशन बोर्ड की बैठक बुलाई गई है। इसपर गंभीरता से विचार हो रहा है।